Thursday Talks Hindi Baaten 9.7.15

hindibaaten 9.7.15 Thursday talks hindi baaten logo

 

monsoon wind

scattered red petals

on raindrop scattered grass

the green glorious veil

of newlywed bride

glittered with ruby drops.

 

Have a great day/days ahead, love and hugs.

first gift from my priceless friend “Itsmine”, God bless you my dear friend, his poem showed up one day earlier, here it is:

 

इंतजार में आपके हम इस कदर खो गये,
के दिन और रात तक भूल गये !

कहना तो चाहते थे बहुत कुछ,
लेकिन वक्त कम था
जाने की थी जल्दी आपको ,
इसका ही तो हमें बड़ा गम था !

दिलके मंदिरमे, मूरत आपकी बसाई है
आँखों मै सूरत आपकी उतारी है
फिर भी तरस गयी है ये आँखे,
आपकी सूरत के लिए
और तड़प उठा है ये दिल
आपकी एक झलक के लिए !

अलविदा कहना चाहते है मगर,
हम जुड़े ही कब थे
जुड़ना तो चाहते है मगर ,
फिर से मिले ही कब है !

चाहता हु के ,ये आवाज दिल की पहुंच जाए आप तक ,
लेकिन जानता भी तो नहीं, के राह देखनी पड़ेगी कब तक !

क्या चल रहा है आपके दिल मै ,
काश ये जानने का कोई साधन होता
तो क्या करना है हमें,
ये समजना भी आसान होता !

आशिक तो हजारो होंगे आपके जिस्म के मगर ,
हमें तो आपकी रूह से प्यार है !,
चाहने वाले हमारे भी बहुत है ,
पर ये दिल आपके लिए ही बेक़रार है !!

शायद कमी हममे ही होगी
जो ये दिल संभाल न सके,
लेकिन आपने भी वो मूवी देखि ही होगी-
“दिल तो बच्चा है जी,थोड़ा कच्चा है जी ” !

अब और न तड़पाओ हमें , आ भी जाओ ,
और जितने भी समोसे बचे है,सब खा भी जाओ !
-Itsmine
can you please translate this in english, only if you have free time & will ,because I am just unable to translate it properly, I had tried but lots of correction R needed .. as you have that skill so if you are comfortable ,then please..
-yours dear friend
Itsmine

I deepen so much in your waiting ,

that I even Forgot days and nights !

Wanted so much to say ,

But there was no time

You were in so much hurry,

And that was my reason to worry !

In the temple of heart,

there is one of your images,

I have your photograph in my eyes

Yet compassion is ,

these eyes are waiting to see your face

And this heart is yearning For your one glance

Want to say goodbye

But When we were involved ?

And also eager to joine with you

but When we meet again ?

I want ,this voice of my heart reaches out to you

But how long will it take to reach,I even don’t know

I wish there would have some means of knowing

that What’s going on in your heart,

So that it will be easier for me

To understand How to react !

May be there are thousands of lovers of your body,

But I am in love with your soul !

I also have many fans

But my heart is your fan !!

May be fault is in me,

That I cant control my heart,

But you must know

That –“heart is the child & little rough”

So please don’t squirm me & come faster,

And eat all that pizza which is yet to finish !

 

Rest of the people??

 

Vishal with Sooni Raaten

https://vishalbheeroo.wordpress.com/2015/07/09/hindi-baatein-sooni-raat/

 

Praveen has given us two gifts, one his fantastic story “Reborn moon”, go to his (storyvory.wordpress.com) blog directly and read the stories there if the link does not works, the second poem from his poetry collection is here:

“शब्द”

जब अकेला शब्द था
पाबंदियों से मुक्तन था वो
जैसे बेसरहद हवा
बनना चाहा था किसी दिन
अपने ही जैसों को चुन चुन
मिलके कोई फ़ल्सफ़ा

पर न कोई मिल सका तो
सब्र वो ना कर सका
और लक्ष्य से वो मुड़ गया
अर्थ अपना भूलकर
यूँ ही लपककर इक निरर्थक
वाक्य से वो जुड़ गया

होड़ में पाने की सब कुछ
भीड़ में शब्दों की अब वो
एक पल में घुल गया
अनगिनत वाक्यों ने मिलकर
पृष्ठत, पोथी, वाचनालय
में उसे ओझल किया

सर पे उसको छत मिली अब
ढेरों की संगत मिली
पर उड़ न पाया फिर कभी
व्याकरण की हद में रहकर
पृष्ठर की सरहद में बँधकर
घुट रही थी साँस भी

भेड़ की इस चाल में यूँ
इस भरे जंजाल में
काहे वो आकर फँस गया ?
वो तो शोला था भड़कता
बौनी सी इक बूँद भर से
कैसे डरके बुझ गया ?

भूल थी यूँ सबसे जुड़ना
जैसे मानों उसका अपना
एक अक्षर कम हुआ
खो गया सब फ़लसफ़ा
बस रह गया काग़ज़ पे धब्बा
जो “अहम्” से “हम” हुआ !

जब अकेला शब्द था
पाबंदियों से मुक्तन था वो
जैसे बेसरहद हवा
—————————
Cheers!

 

Indira and Sonu next week maybe??? eh????

 

Sonu finally shared hers, check it out @ https://momsprincesspari.wordpress.com/2015/07/02/how-we-met/

She is a fantastic writer of English stories too, do check out her works!

 

Indira, get well soon and share Bengali and hindi works with us, please!

Finally, Indira’s poem, last but certainly not the least –

https://seepiya.wordpress.com/2015/07/12

 

Have fun, do read each other’s works please and leave comments, that is the best way of encouraging each other!

lots of love.

 

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16 thoughts on “Thursday Talks Hindi Baaten 9.7.15

  1. Hi all,
    Having assumed that I’ve to post my ‘Thursday Talk’ entry in comments, I had already done so soon after Wednesday midnight 🙂 as a comment on your (Sharmishtha’s) post reminding us about ‘Thursday Talk’
    But I don’t see it here, so am pasting the same below. Cheers!

    हैल्लो! सलाम! नमस्ते! यहाँ मुम्बई यानी भारत में तो गुरुवार शुरू हो चुका है, लिहाज़ा ‘Thursday Talk’ के नाम अपना एक लिंक पेश कर रहा हूँ.

    https://storyvory.wordpress.com/2015/06/29/%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A5%A6%E0%A5%A7/

    ये मेरे ब्लॉग ‘स्टोरीवोरी’ की पहली कहानी ‘फिर वही चाँद’ वैब श्रृंखला की पहला कड़ी है. आप सभी को मैं अपने ब्लॉग में पधारने के लिए आमंत्रित करता हूँ.

    “स्टोरीवोरी” ब्लॉग में इसी कहानी को आप अंग्रेज़ी में “Reborn Moon” के नाम से भी पढ़ सकते हैं.
    यह कहानी दोनों भाषाओं में हर सोमवार को कड़ी दर कड़ी आगे बढ़ेगी (कुछ कुछ टीवी सीरियल्स की तरह, पर हाँ, देखने वाली नहीं, पढ़ने वाली होगी)

    हिन्दी लेखन को बढ़ावा दिलाने के उद्देश्य से उठाये इस कदम के लिए शर्मिष्ठा जी को बहुत बहुत बधाई.

    शर्मिष्ठा जी, आप ने शायद यह कड़ी अंग्रेज़ी में पढ़ ली है, पर आज ‘Thursday Talk’ के उपलक्ष्य में हिंदी में भी पढ़कर देख लें. (वैसे ब्लॉग में दूसरी कड़ी भी प्रकाशित हो चुकी है)

    और ब्लॉगर साथियों के लिंक्स का आज दिन भर इंतज़ार रहेगा.

    शुक्रिया, सबको सलाम नमस्कार!
    सादर, सस्नेह,
    प्रवीण राज

    Like

  2. A poem from “बने ना बने कारवाँ”, my published book of Hindi poems.

    “शब्द”

    जब अकेला शब्द था
    पाबंदियों से मुक्तन था वो
    जैसे बेसरहद हवा
    बनना चाहा था किसी दिन
    अपने ही जैसों को चुन चुन
    मिलके कोई फ़ल्सफ़ा

    पर न कोई मिल सका तो
    सब्र वो ना कर सका
    और लक्ष्य से वो मुड़ गया
    अर्थ अपना भूलकर
    यूँ ही लपककर इक निरर्थक
    वाक्य से वो जुड़ गया

    होड़ में पाने की सब कुछ
    भीड़ में शब्दों की अब वो
    एक पल में घुल गया
    अनगिनत वाक्यों ने मिलकर
    पृष्ठत, पोथी, वाचनालय
    में उसे ओझल किया

    सर पे उसको छत मिली अब
    ढेरों की संगत मिली
    पर उड़ न पाया फिर कभी
    व्याकरण की हद में रहकर
    पृष्ठर की सरहद में बँधकर
    घुट रही थी साँस भी

    भेड़ की इस चाल में यूँ
    इस भरे जंजाल में
    काहे वो आकर फँस गया ?
    वो तो शोला था भड़कता
    बौनी सी इक बूँद भर से
    कैसे डरके बुझ गया ?

    भूल थी यूँ सबसे जुड़ना
    जैसे मानों उसका अपना
    एक अक्षर कम हुआ
    खो गया सब फ़लसफ़ा
    बस रह गया काग़ज़ पे धब्बा
    जो “अहम्” से “हम” हुआ !

    जब अकेला शब्द था
    पाबंदियों से मुक्तन था वो
    जैसे बेसरहद हवा
    —————————
    Cheers!

    Liked by 1 person

  3. *Errata: I had copy-pasted this above poem from a Word file, but some words came out wrong here, somehow.
    In the line *पाबंदियों से मुक्त था”
    ‘mukt’ got printed as ‘muktan’. Twice (first and last stanza).
    In the line “पृष्ठ, पोथी,वाचनालय”
    ‘prishth’ got printed as ‘prishthat’.
    In the line “पृष्ठ की सरहद में बंधकर”
    ‘prishth’ got printed as ‘prishthar’.
    In the line “खो गया सब फ़ल्सफ़ा”
    ‘falsafa’ got printed as ‘falasafa’.

    Apologies. If I had the edit after publishing option, I would have corrected it.
    Next time around, I’ll type my poems afresh rather than copy-pasting.
    Meanwhile, hope the errors don’t spoil your reading experience.
    Cheers!

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